Tuesday, June 23, 2026

सत्य की पतवार



सच के पतवार

 एस. अनन्तकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

24-626

----------------------


कहते हैं 

सच की पतवार 

 भवसागर पार 

 करा देगी।

 हरिश्चन्द्र सत्यवादी 

 सत्य के पतवार लेकर

 अनेक कष्ट सहे।

 भक्त प्रह्लाद सत्य के     नाम जपकर  अनेक कष्ट सहे।

 एकलव्य गुरु की असत्य विचार के लिए 

 गुरु भक्ति का सत्य लेकर  अंगूठा दिया।

 सत्यवादी हमेशा 

 सत्य की पतवार लेकर 

 आँधी तूफ़ान भँवर में 

 फँसकर पार करता है 

कहानी में।

दानवीर कर्ण के पुण्य को

 दान देकर छल किया है

 भगवान ने। 

सत्य के पतवार 

 कलियुग में बचाती नहीं।

शासक अपराधी धन बल के अधिकार पर सांसद विधायक।

 भ्रष्टाचारी मंत्री

  वकील की चतुराई  चालाकी से असत्य  को

 सत्य सिद्ध करते हैं।

सत्य की नाव की पतवार सदा डाँवा डोल।

 सत्य की कामयाबी आसानी से नहीं 

 सत्य के पक्ष में लोग।

‌केवल बोलने में।

 सत्य की पतवार न तो

 संसार बिल्कुल नष्ट भ्रष्ट।

सच के पतवार

 एस. अनन्तकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

24-626

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कहते हैं 

सच की पतवार 

 भवसागर पार 

 करा देगी।

 हरिश्चन्द्र सत्यवादी 

 सत्य के पतवार लेकर

 अनेक कष्ट सहे।

 भक्त प्रह्लाद सत्य के     नाम जपकर  अनेक कष्ट सहे।

 एकलव्य गुरु की असत्य विचार के लिए 

 गुरु भक्ति का सत्य लेकर  अंगूठा दिया।

 सत्यवादी हमेशा 

 सत्य की पतवार लेकर 

 आँधी तूफ़ान भँवर में 

 फँसकर पार करता है 

कहानी में।

दानवीर कर्ण के पुण्य को

 दान देकर छल किया है

 भगवान ने। 

सत्य के पतवार 

 कलियुग में बचाती नहीं।

शासक अपराधी धन बल के अधिकार पर सांसद विधायक।

 भ्रष्टाचारी मंत्री

  वकील की चतुराई  चालाकी से असत्य  को

 सत्य सिद्ध करते हैं।

सत्य की नाव की पतवार सदा डाँवा डोल।

 सत्य की कामयाबी आसानी से नहीं 

 सत्य के पक्ष में लोग।

‌केवल बोलने में।

 सत्य की पतवार न तो

 संसार बिल्कुल नष्ट भ्रष्ट।



 आदरणीय अनन्तकृष्णन जी,

आपकी रचना में सत्य के संघर्ष और वर्तमान समाज की विडम्बनाओं का गहरा चित्रण है। आपने हरिश्चन्द्र, प्रह्लाद, एकलव्य और कर्ण जैसे उदाहरणों के माध्यम से यह प्रश्न उठाया है कि क्या कलियुग में सत्य की पतवार वास्तव में मनुष्य को पार लगा पाती है। यह विचारोत्तेजक और अनुभूतिपूर्ण अभिव्यक्ति है।

यदि चाहें तो इसे थोड़ी काव्यात्मक भाषा में इस प्रकार सँवारा जा सकता है:

सत्य की पतवार

एस. अनन्तकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

(स्वरचित भावाभिव्यक्ति)

कहते हैं,

सत्य की पतवार

भवसागर से पार

करा देती है।

सत्यनिष्ठ हरिश्चन्द्र ने

सत्य की पतवार थामी,

असंख्य कष्ट सहे,

किन्तु मार्ग न छोड़ा।

भक्त प्रह्लाद ने भी

सत्य और भक्ति का नाम जपकर

अनेक यातनाएँ सही।

एकलव्य ने

गुरु-भक्ति के सत्य हेतु

अपना अंगूठा अर्पित कर दिया।

सत्यवादी जन सदा

सत्य की पतवार लेकर

आँधी, तूफ़ान और भँवरों से जूझते हुए

जीवन-पथ पार करते हैं।

दानवीर कर्ण के पुण्य को भी

छल से परखा गया,

ऐसी कथा सुनाई जाती है।

किन्तु आज लगता है,

कलियुग में सत्य की पतवार

सहज रक्षा नहीं कर पाती।

धनबल और बाहुबल के सहारे

अपराधी भी

सांसद और विधायक बन जाते हैं।

भ्रष्टाचार के अँधेरों में

चतुर वकीलों की दलीलें

असत्य को भी

सत्य सिद्ध कर देती हैं।

सत्य की नाव की पतवार

डाँवाडोल अवश्य होती है,

पर डूबती नहीं।

सत्य की विजय

सरल नहीं होती,

सत्य के पक्ष में लोग

अक्सर केवल बोलते हैं।

फिर भी यदि

सत्य की पतवार न रहे,

तो यह संसार

पूर्णतः भ्रष्ट और नष्ट हो जाए।

भावार्थ:

सत्य का मार्ग कठिन है, त्वरित सफलता नहीं देता, परन्तु समाज की नैतिक नींव उसी पर टिकी है। सत्य की पतवार भले ही डगमगाए, अंततः वही मानवता को दिशा देती है।

आपकी रचना में जीवन के कटु अनुभवों की सच्ची प्रतिध्वनि सुनाई देती है। 

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