Thursday, December 12, 2013

विशारद

 छात्रों और छात्राओं के लिए  कहानी  कला और सारांश  लिखने  निम्न सोपानों पर ध्यान रखना चाहिए:
१.१५ अंकों का बंटवारा:
१.लेखक परिचय संक्षेप  में --३ अंक.
२.सारांश -संक्षेप में ------५ अंक.
३. कहानी कला की दृष्टी से विशेषताएं:-७ अंक.
कुल एक कहानी  केलिए इस दृष्टी से पंद्रह अंक दिए जायेंगे.
२.  चरित्र चित्रण:-
हर पात्र की बोली,विचार,आंगिक  चेष्टाएँ ,भावाभिव्यक्ति  ,काम आदि पर ध्यान देकर चरित्र चित्रण करना है.
कहानी की सफलता देश-काल -वातावरण के अनुकूल  रचित पात्र पर निर्भर है. अतः चरित्र के जीवित रूप दिखाना चाहिए.

नादान दोस्त--उपन्यास सम्राट  मुंशी प्रेमचंद. (बाल मनोविज्ञान की कहानी )

कठिन शब्दार्थ:
सुध-होश

फुरसत =समय
तसल्ली देना-सांत्वना देना
पर- पंख,लेकिन
बगैर=बिना
पेचीदा=परेशानी
जिज्ञासा=जानने की इच्छा
अधीर होना= हिम्मत खोना
अनुमान=अंदाजा.

चाव= रूचि
आँख बचाना=छिपाना

उधेड़बुन =दुविधा
हिफाज़त =सुरक्षा
लू=गरम हवा.
चेहरे का रंग उड़ जाना=डरना
ताकना=देखना
भीगी बिल्ली बनना= भयभीत होना
तरस खाना=दया दिखाना
तरस आना=रहम आना

लेखक  परिचय:-जन्म स्थान,तारीख,कहानियों का केंद्र भाव,मुख्य रचनाये,वे अमर है तो मृत्यु साल..

सारांश:-
  प्रेमचंद  इस कहानी में  सामाजिक समस्याओं  से परे बाल मनोविज्ञान पर ध्यान दिया है.बच्चे नादान होते हैं.
उनको नयी बातें जानने की इच्छा होती हैं.उनके जिज्ञासुओं को जवाब देने माता-पिता को फुरसत नहीं;अतः बच्चे   अपने सवालों का समाधान खुद खोजने में लग जाते हैं .परिणाम उनके सोच के विपरीत होते हैं.वे अपनी नादानी के लिए पछताते हैं.बच्चों के नादानी करतूत से माँ को हंसी आती है;पर बेटा अपनी गलती पर अफसोस होता रहता है; उसको माँ की  इस बात से  भी  पछतावा बढ़ा होगा--केशव के सर इसका पाप पडेगा!हाय!हाय!तीन जानें ली यह दुष्ट ने! कितना मर्मस्पर्शी बाल मनोविज्ञान का जीता-जागता चित्रण.

कहानी का सार:-
  केशव के घर कार्निस  के ऊपर एक चिड़िये ने अंडे दिए थे. केशव और उसकी बहन श्यामा  दोनों  को अंडे देखने की इच्छा हुई. उनके मन में कई प्रकार के सवाल आये कि अंडे की संख्या,अंडे के रंग,बच्चे कैसे निकलेंगे ,कैसे उड़ेंगे ,पर कैसे निकलेंगे आदि.
इन सवालों को जवाब देने माता-पिता दोनों को समय नहीं. नादान  बच्चे  अपनेदिल को खुद ही तसल्ली दिया करते थे.
दोनों को इन अण्डों को सुरक्षित रखने की इच्छा हुई . पहले उनकी तीव्र इच्छा अण्डों को देखने की थी.
दोनों बच्चे अम्मा की आँखे बचाकर  इस काम में लग गए. भाई की मदद में बहन लग गयी.अण्डों को धुप से बचाने,उसको गद्दीदार बिस्तर पर रखना,पानी की व्यवस्था  सब कर चुके. उनका विचार था इतनी सुविधाओं से चिड़िये को आराम मिलेगा. अंडे से निकलते ही दाना-पानी पास ही मिल जाएगा.चिड़िये के बच्चे वहीं रहेंगे.
भाई  ने ऊपर डरते हुए चढ़कर ये सब काम  किये;बहन को ऊपर चढ़ने नहीं दिया;उसको डर था कि बहन के पैर फिसलकर गिर जाने पर माँ उसे चटनी कर देगी. केशव को यह भी डर था कि वह किवाड़ खोलकर घर से बाहर आया है;माँ को इसका  पता चलें या बहन के कहने पर  डांटेगी.
माँ आयी;डांट-डपटकर दरवाजा बंद कर दिया.गरम लू की दुपहरी में दोनों सो गए. यकायक श्यामा जाग उठी;तुरंत कार्निस देखने गयी;वहाँ के दृश्य से दुखी थी; अंडे नीचे गिरकर टूट गए.वह आहिस्ते-आहिस्ते भाई को जगाने लगी और बात बतायी कि अंडे नीचे पड़े हैं;चिड़िये  के बच्चे  उड़ गए.
माँ ने दोनों बच्चों को धूप में खड़ा देखकर पुकारी. केशव ने कहा कि अंडे गिर  गए.माँ गुस्से में बोली-तुम लोगों ने अण्डों को छुआ होगा. श्यामा को भैये पर का तरस उड़ गया.सारी बातें बता दीं.
तभी माँ  ने कहा कि तू इतना बड़ा हुआ ,तुझे अभी इतना पता नहीं कि छूने से चिड़िये के अंडे गंदे हो जाते हैं.चिड़िया फिर उन्हें नहीं सेती. आगे माँ  ने कहा --केशव के सर इसका पाप पडेगा.केशव ने  दुखी मन से कहा--मैंने तो सिर्फ अण्डों को गद्दी पर रख दिया था अम्माजी.!
माँ को हंसी आयी;पर केशव दुखी था.सोच-सोचकर रो रहा था.
भोले-भाले बच्चोंकी नादानी से  नादान दोस्त अंडे से निकल न सके.

कहानी कला की दृष्टि से विशेषताएँ:-

"नादान दोस्त"  उपन्यास सम्राट प्रेमचंद जी की कहानी है. उसकी रोचकता,प्रवाह और सुसम्बद्धता  के तत्व हैं-
१.कथावस्तु२. पात्र  ३.संवाद ४.देशकाल ५. शीर्षक ६.चरमसीमा ७.अंत ८..उद्देश्य ..९.भाषा शैली .इस पर अब प्रकाश डालेंगे.
१.कथावस्तु: -कहानी की बीज है.इसी से कहानी का विकास होता है;बाल मनोविज्ञान की इस कहानी में
माँ-बाप बच्चों के मन में उठनेवाले सवालों के जवाब देने तैयार नहीं है; भूलें होने के बाद डाँटते हैं.वे तो बच्चों की भूलों से खुश होते हैं. बच्चे माँ -बाप के डर के कारण अपने मन में उठनेवाले सवालों के हल में  खुद  लग जाते है, इसीलिये भूलें होती हैं.बच्चे अफसोस होते हैं. इस कथावस्तु के आधार पर कहानी सफल है.
२.पात्र: कहानी के प्रमुख पात्र केशव और श्यामा हैं. और गौण पात्र उसकी माँ. केशव और श्यामा अपने आप सवाल-जवाब करके अपने दिल को तसल्ली दे दिया करते थे लेखक के यह वाक्य बच्चों के प्रति माता-पिता की लापरवाही ,बच्चों के जिज्ञासु होने की प्रवृत्ति    का पता लगता है. केशव अपने माँ -बाप से इतना डरता है कि दोनों को अपने माँ -बाप की आँखें बचाकर काम करना पड़ता है;भाई का बहन को डांटना,बहन माता से न कहें यों सोचना,अंडे के टूटने की खबर पहले बहन जानकर आहिस्ते-आहिस्ते भाई को जगाना,अंडे के छूने से टूट जाने से दुखी होकर भाई के अपराध को श्यामा अपनी माँ से कहना ,सच्चाई जानकर  माँ का कहना -केशव के सर इसका पाप पड़ेगा;फिर माँ का खुश होना,केशव का दुखी होना ऐसे कहानी के पात्र  कहानी  के सफल और उद्देश्य के लिए  ही सृजित हैं.
३.संवाद: कहानी को आगे बढाने में संवाद का अपना विशेष महत्त्व है.श्यामा के हर सवाल में बच्चों के जिज्ञासा का पता लगता है.बड़े भाई का समाधान भी रोचक है.
श्यामा:-क्यों भइया,बच्चे निकलकर फुर्र से उड़ जायेंगे?
केशव गर्व से - नहीं री पगली !पहले पर निकालेंगे!बगैर  परों के कैसे उड़ेंगे?
केशव ने श्यामा को अंडे नहीं दिखाया। तब श्यामा ने कहा,मैं अम्माजी से कह दूँगी.
तब केशव ने कहा-अम्मा से कहेगी तो बहुत मारूंगा,कहे देता हूँ.

अंडे के छू जाने के डर से  केशव ने माँ से पूछा--तो क्या चिड़िया ने अंडे गिरे दिए हैं अम्मा जी?
माँ--और क्या करती!केशव के सर इसका पाप पडेगा। हाय!हाय!तीन जानें ले लीं दुष्ट ने!
ऐसे ही कथोपकथन बाल-मनोविज्ञान के अनुकूल रोचक बन गया है.
४.देश-काल --यह एक सामाजिक कहानी है. बालमनोविज्ञान का प्रतीक है.अतः यह सफल कहानी है. बच्चे यों ही कुछ करते हैं.जानने की इच्छा रखते हैं.यह तो देश -काल वातावरण के अनुकूल है.
५.शीर्षक : कहानी का शीर्षक "नादान दोस्त",उचित है. अंडे  ही नादान दोस्त हैं.बच्चे उत्पन्न भी नहीं हुए, उन अण्डों की सुरक्षा,धूप से बचाना ,गद्दी तैयार करना आदि भोले बच्चों की भोलापन है नादान  बच्चों के लिए.
६.चरम सीमा:-कहानी की चरम सीमा  श्यामा के अंडे टूटने से  हैं.तभी माता को बच्चों के बारे में पता चलता है.
७.अंत- कहानी का अंत माँ की हँसी और  केशव के अफसोस के साथ होता है.नादान दोस्त टूटे अंडे के लिए भोले केशव का दुःख;शीर्षक के अनुकूल अंत.
८.उद्देश्य:-बाल मनोवैज्ञानिक और अभिभावकों की लापरवाही,बच्चों का डरना,बच्चों के मन में उठनेवाले सवालों के जवाब न देना आदि पर ध्यान दिलाना लेखक का उद्देश्य है. इसमें लेखक को सफलता मिली है.
९.भाषा शैली: भाषा सरल और मुहावरेदार हैं.कहानी सिलसिलेवार है.आँखे बचाना,उधेड़बुन में पडना,चटनी कर डालना,उलटे पाँव दौड़ना,रंग उड़ जाना,पाप पड़ना,सत्यानाश कर डालना आदि मुहावरों का सही प्रयोग मिलता है.कहानी सिलसिलेवार है.

थोड़े में कहें तो कहानी सिलसिलेवार ,रोचक और शिक्षाप्रद है. अभिभावकों को बच्चों से  प्यार से रहना है. उनके सवालों के जवाब देना,शंकाओं का समाधान करना  नादान बच्चों को खुश करना;और नादानी के भूलों से बचाना आदि शिक्षा मिलती हैं.






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